छ. ग .सरकार की जीरो टालरेंस पर खतरा : सी एम हेल्पलाइन की विश्वसनीयता पारदर्शिता पर वन विभाग ने लगाया ग्रहण।

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छ. ग .सरकार की जीरो टालरेंस पर खतरा : सी एम हेल्पलाइन की विश्वसनीयता पारदर्शिता पर वन विभाग ने लगाया ग्रहण ,शिकायत कर्ता को सुने बगैर जाँच को कर दिया बंद शासन की छबि की धूमिल।

गरियाबंद: कक्ष 582 में अवैध कटाई, बीट गार्ड को बचाने एकपक्षीय जाँच कर दी क्लीन चिट, शिकायतकर्ता को नहीं बुलाया

गरियाबंद, 6 सितंबर 2026। वन परिक्षेत्र गरियाबंद के कक्ष क्रमांक 582 में  विभिन्न प्रजाति के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। ग्रामीणों द्वारा की गई लिखित शिकायत के बाद विभाग ने खानापूर्ति के लिए जाँच तो की, लेकिन शिकायतकर्ता को जाँच में शामिल किए बिना ही संबंधित बीट गार्ड को क्लीन चिट दे दी गई।

शिकायतकर्ता रितु सोम, निवासी कोयला भट्टा, केशोडार ने बताया कि उन्होंने कक्ष 582 में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की शिकायत सी एम हेल्पलाइन में की गई थी।
इस अवैध कटाई प्रकरण में जाँच हेतु ऑनलाइन वन परिक्षेत्र अधिकारी गरियाबंद को आया वन परिक्षेत्र अधिकारी गरियाबंद प्रांजली मिश्रा ने अपने मातहत बीट गार्ड गरियाबंद बीट टेमन दुबे को बचाने शिकायत प्राप्त होने के दूसरे ही दिन अवैध iकटाई स्थल पर अपने कर्मचारियों को भेज कर POR कार्यवाही की जबकि शिकायत होने के बाद बिना शिकायत कर्ता को सूचना दिये कार्यवाही पर ले जाने गुपचुप तरीके से कार्यवाही कर मामले की लीपा पोती कर दी वहीं मामले पर जाँच कमेटी कब बनी कौन जाँच अधिकारी था कब जाँच हुई इसकी जानकारी शिकायत कर्ता को नहीं जाँच की लीपा पोती मन माफिक आरोपी तय कर प्रतीकात्मक कार्यवाही कर खुद की पीठ थपथपा कर जाँच को खत्म कर दी हद तो तब हो गई जब कार्यवाही की प्रति शिकायत कर्ता को भेजी गई तो शिकायत कर्ता ने जाँच कब हुई किसने किया इसकी जानकारी नहीं होने जाँच पर असंतुष्ट होकर अपनी प्रतिक्रियां सी एम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज कर दी अब आगे जाँच के लियॆ यह शिकायत एस डी ओ गरियाबंद  L-2 को प्रस्तुत हुई द्वितीय जाँच अधिकारी एस डी ओ वन गरियाबंद ने शिकायत कर्ता की असहमति असंतुष्टि को नजर अंदाज कर सीधा रेंजर के जाँच को अंतिम मान  बिना किसी जाँच कर स्पेशल क्लोजर  मे दर्ज कर जाँच बंद कर दी

अवैध कटाई प्रकरण पर पर्दा डाल कर बीट गार्ड को क्लीन चिट दे डाली।
परंतु विभागीय अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को सूचना दिए बिना, उनका पक्ष सुने बिना ही एकपक्षीय जाँच कर बीट गार्ड को निर्दोष बता दिया।

वहीं बीट गार्ड टेमन दुबे को कई अतिरिक्त बीट का प्रभार देकर अवैध कटाई प्रकरण पर ईनाम दिया जा रहा ऐसा प्रतीत होता हैं।

यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। बिना शिकायतकर्ता को सुने, बिना मौका मुआयना कराए जाँच में शामिल किये बिना और बिना साक्ष्य लिए क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है?

ग्रामीणों के सवाल:

इस एकपक्षीय जाँच से विभाग के उन अधिकारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं जिन्होंने मनमाने ढंग से क्लीन चिट दी है।

शिकायतकर्ता ने मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त, कलेक्टर गरियाबंद और वनमंडलाधिकारी गरियाबंद से मांग की है कि कक्ष 582 के पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय समिति से पुनः जाँच कराई जाए, जिसमें शिकायतकर्ता को भी शामिल किया जाए और दोषी बीट गार्ड व क्लीन चिट देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।

मामले पर यह शिकायत कर्ता का पक्ष हैं वन विभाग का  पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

वहीं देखना होगा की खबर  प्रकाशन के बाद नये नवेले वन मंडलाधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं बीट गार्ड को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करेंगे या बाकी अफसरों के फर्जी जाँच रिपोर्ट को स्वीकारेंगे।

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