समग्र रिपोर्ट कार्ड’ की  और बार-बार बदलाव से शिक्षक और अभिभावक* *परेशान*, *शिक्षक फेडरेशन ने उठाई बदलाव की माँग

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रायपुर – छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने विद्यार्थियों के लिए लागू किए गए ‘समग्र रिपोर्ट कार्ड’ की व्यावहारिक समस्याओं को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित किया है। फेडरेशन ने प्रबंध संचालक, समग्र शिक्षा को एक सुझाव व माँग पत्र सौंपकर रिपोर्ट कार्ड की प्रक्रिया में सुधार करने की अपील की है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र कुमार राठौर ने बताया कि RTE 2009 के तहत कक्षा 1ली से 8वीं तक के बच्चों के मूल्यांकन हेतु जिस रिपोर्ट कार्ड का उपयोग किया जा रहा है, वह तकनीकी रूप से बहुत जटिल है।

शिक्षक फेडरेशन ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए हैं:

* भाषा की जटिलता: रिपोर्ट कार्ड में इस्तेमाल की गई शब्दावली इतनी कठिन और तकनीकी है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक और स्वयं विद्यार्थी उसे समझ नहीं पाते। यहाँ तक कि शिक्षकों को भी इसे सरल भाषा में समझाने में कठिनाई होती है।

* असामयिक परिवर्तन: विभाग द्वारा अक्सर सत्र के बीच (दिसंबर माह) में रिपोर्ट कार्ड के प्रारूप में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे शिक्षकों को रिकॉर्ड संधारण और डेटा प्रविष्टि में भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

* प्रशिक्षण का अभाव: बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण या कार्यशाला के नए प्रारूप लागू कर दिए जाते हैं, जिससे मूल्यांकन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

फेडरेशन की प्रमुख माँगें:

* रिपोर्ट कार्ड का एक स्थाई और सर्वमान्य प्रारूप निर्धारित किया जाए ताकि हर साल होने वाले भ्रम से बचा जा सके।

* रिपोर्ट कार्ड में कठिन ‘शिक्षाविद् शब्दावली’ के स्थान पर आम बोलचाल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग हो।

* यदि कोई बदलाव अनिवार्य हो, तो उसकी घोषणा सत्र के प्रारंभ (जून-जुलाई) में ही कर दी जाए।

* नए प्रारूप को लागू करने से पहले जमीनी स्तर पर शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।

फेडरेशन ने आशा व्यक्त की है कि विभाग छात्र हित और शिक्षकों की सुगमता को ध्यान में रखते हुए इन माँगों पर सकारात्मक निर्णय लेगा।

पदाधिकारियों में — रविन्द्र राठौर, राजू टंडन, देवेंद्र हरमुख, मनीष मिश्रा, शेषनाथ पाण्डेय, बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, सुरजीत सिंह चौहान, सिराज बक्श, पुरुषोत्तम झाड़ी, आदित्य गौरव साहू, टिकेश्वर भोई, तरुण वैष्णव, गोकुल जायसवाल, विजेंद्र चौहान, रोशन सहारे, नोहर चंद्रा, राजेंद्र वर्मा, मनीष डडसेना, हुलेश चंद्राकार, उमा पाण्डेय, नेमी सिन्हा, विपिन यादव, रूपिका रानी मरकाम, चंद्रप्रकाश तिवारी, दिलीप लहरे, अशोक कुमार धुर्वे, वीरेंद्र यादव, पंकज लहरें, दिनेश नायक, अशोक नाग, राम नरेश अजगल्ले, कोमल साहू, रीता भगत, महेश सेठी, दुर्गा वर्मा, मंजू देवांगन, बुधनी अजय, काशी नाथ बघेल, यशवंत यादव, मनोज कश्यप, सीडी भट्ट, रणजीत बनर्जी, आलोक त्रिवेदी, त्रिपेश चापड़ी, संतोष यादव, केशरी पैकरा, प्रदीप पटेल, आशीष गुप्ता, यशवंत दुबे, अभिजीत तिवारी, हेमकुमार साहू, छबि पटेल, इंद्रजीत शर्मा, बिहारीलाल बेरठ, राजेश मिश्रा, रामकृष्ण साहू, उत्तम बघेल, राजा राम पटेल, धनंजय सिंह, नान्हू राजवाड़े, रविन्द्र गिरी, दीनबंधु वैष्णव, रीता भगत ने मांग की है, कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करे।

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