भ्रष्टाचार पर ‘मेहरबान’ तमनार सीईओ ! साहब को RTI अधिनियमों का ज्ञान नहीं या गुनाहगारों को बचाने की है बड़ी सेटिंग ?
जहाँ अपील भी बन जाए औपचारिकता,वहाँ RTI कैसे बने पारदर्शिता का हथियार?
रायगढ़ – भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने तथा विकास कार्यों की पारदर्शिता के लिए बनाए गए RTI अधिनियमो की जिले में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। तमनार जनपद पंचायत में सूचना का अधिकार कानून कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गया है। ग्राम पंचायत महलोई से जुड़े एक RTI मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही की पोल खोल दी है, जहाँ जन सूचना अधिकारी (सचिव) द्वारा समय पर जानकारी न देने के बावजूद अपीलीय अधिकारी व जनपद CEO संजय चन्द्रा ने बिना ठोस सुनवाई सचिव को क्लीन चिट दे दी है।
दरअसल, आवेदक ने 6 दिसंबर 2025 को वर्ष 2017 से 2020 तक के आय-व्यय विवरण, बैंक पासबुक, कैशबुक और बिल-वाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं, लेकिन निर्धारित समयसीमा में न तो सूचना दी गई और न ही कोई जवाब। मजबूर होकर आवेदक ने प्रथम अपील दायर की।
22 जनवरी 2026 को हुई अपील की सुनवाई में हैरान करने वाला घटनाक्रम सामने आया। अपील उसी दिन प्राप्त दिखाकर उसी दिन आदेश पारित कर दिया गया। न तो तथ्यों की जांच हुई, न यह सुनिश्चित किया गया कि आवेदक को सूचना मिली भी या नहीं, और सीधे अपील नस्तीबद्ध कर दी गई।
सबसे गंभीर बात यह कि RTI कानून की समय सीमा में सूचना देने में देरी हुई है और ऐसे में अपील पर जानकारी निःशुल्क दी जाती है। मगर बड़ी विडंबना की बात है कि ग्राम पंचायत महलोई, पढ़िगॉव, देवगॉव के द्वारा शुल्क का हवाला देकर मामला नस्तीबद्ध कर दिया गया। यह पूरा प्रकरण तमनार जनपद में RTI कानून के मज़ाक और दोषियों को संरक्षण देने का उदाहरण बन गया है।
अपीलीय अधिकारी का संरक्षण या अधिनियम की जानकारी का अभाव?
नियम विपरीत आरटीआई की अपील को खारिज कर नस्तीबद्ध करने के मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या पंचायत के व्याप्त भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए जानबूझकर गुमराह किया जा रहा ? या फिर भ्रष्ट सचिव को जनपद के अपीलीय अधिकारी का खुला संरक्षण प्राप्त है या उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम पूर्ण ज्ञान ही नहीं?
अपीलीय अधिकारी की संदिग्ध भूमिका…
पुरे मामले में कही न कही अपीलीय अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार को छिपाने में सहयोग करने कि बात से इंकार नहीं किया जा सकता। जो कि नैतिक जिम्मेदारियां की विपरीत है और उनके संदिग्ध भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल आवेदक ने दुतीय अपील कर दी है साथ ही मामले कि शिकायत राज्य सुचना आयोग जिला कलेक्टर को कि करने कि तैयारी कि जा रही है।
बहरहाल जन सूचना अधिकारी के भ्रष्टाचार और मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अपील अधिकारी कानून द्वारा नियुक्त है लेकिन जब अपील भी संरक्षण में बदल जाए तो RTI सिर्फ कागज़ों की शोभा रह जाती है।
