बजट में कैशलेस चिकित्सा की मांग पूरी, अब नियमों की रूपरेखा पर तेज़ी — मुख्य स्वास्थ्य सचिव से मिला प्रतिनिधिमंडल

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राज्य में शासकीय कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर अब प्रक्रिया तेज़ हो गई है। बजट में इस मांग के पूर्ण होने के बाद नियमों की रूपरेखा तय करने हेतु कैशलेस चिकित्सा संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्य स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से लगातार दूसरे दौर की चर्चा हुई।

यह प्रतिनिधिमंडल संघ की अध्यक्ष उषा चंद्राकार के नेतृत्व में पहुंचा, जिसमें रूक्मणी साहू एवं कुंदन साहू श्रीमती समीरा राठौर भी शामिल थे।

बैठक के दौरान कैशलेस चिकित्सा योजना के नियमों एवं प्रक्रियाओं पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्य स्वास्थ्य सचिव ने संकेत दिए कि नियमों को अप्रैल माह में ही लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों को शीघ्र लाभ मिल सके।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक नई कैशलेस व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू नहीं हो जाती, तब तक शासकीय कर्मचारी पूर्ववत चिकित्सा प्रतिपूर्ति (reimbursement) का लाभ लेते रहेंगे।

अमित कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार ऐसी कैशलेस चिकित्सा योजना लाने का प्रयास कर रही है, जो न केवल अन्य राज्यों से बेहतर हो, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सके।

संघ की अध्यक्ष उषा चंद्राकार ने कहा कि यह कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को बजट में स्थान मिला है और अब सरकार गंभीरता से इसके नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी है।

बैठक को कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी।

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