टेट अनिवार्यता के खिलाफ चार अप्रैल को राजधानी दिल्ली में बड़ा आंदोलन …..
छत्तीसगढ़ के समस्त शिक्षक संगठन टीएफआई के बैनर तले एकजुट ….
दिल्ली आंदोलन में प्रदेश से हजारों की संख्या में कुच करेंगे पीड़ित शिक्षक…..
रायपुर – टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन पुरे भारत देश के शिक्षक साथियों के हित में और सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश जिसमें सभी शिक्षक को टेट पास करना होगा अन्यथा उनकी नौकरी पे आंच आ सकती है। के विरोध में हुआ है। जिसमें छत्तीसगढ़ के शिक्षक नेता केदार जैन, मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर एवं जाकेश साहू चारों ने आज सभी शिक्षक संगठन को एक करते हुए रायपुर में एक बैठक रखी थी।
जिसमें राज्य के जो शिक्षक टेट क्वालिफाइड नहीं है उनके पक्ष में अपनी बात रखते हुए सभी को मिलकर आंदोलन करना पड़ेगा और बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश आया है उसके अनुसार अगर शिक्षक अगर 2 साल में टेट पास नहीं करते हैं तो उनकी नौकरी जा सकती है।
ऐसे हमारे छत्तीसगढ़ राज्य में 82,000 से ज्यादा शिक्षक है जो टेट क्वालिफाइड नहीं है। इसलिए उनके पक्ष में हमें अपनी आवाज उठानी पड़ेगी और सरकार तक अपनी बात पहुंचानी पड़ेगी। इसलिए यह टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया है। जिसके तहत हमें चार अप्रैल 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन है। उसी के संबंध में आज महत्वपूर्ण बैठक रखी गई थी।
शिक्षक नेता केदार जैन, रविन्द्र राठौर, मनीष मिश्रा एवं जाकेश साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ के समस्त शिक्षक संगठन ने आज रायपुर में बैठक करते हुए टेट के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की और सबसे बड़ी बात सभी संगठनो ने एक राय होकर इसके खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूँक दिया है।
टेट एक अहम मुद्दा है जिसमें कई शिक्षक जो है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें टेट एग्जाम देना पड़ेगा। ताकि वह अपनी नौकरी बचा सके और साथ में प्रमोशन के लिए भी उन्हें टेट का एग्जाम क्वालिफाइड करना पड़ेगा इसकी वजह से कई शिक्षक साथी जो है टीईटी के नियम के आने से पहले नियुक्ति पाए हैं और वह उसे समय की जो नियुक्ति का जो पात्रता था उसे उसे क्वालिफाइड करके आया है उसके बावजूद अगर उन्हें टेट लिखना पड़ता है तो जिससे शिक्षक साथी काफी ज्यादा नाराज हैं और वह चाहते हैं कि सरकार इसके मुद्दे पर कोई ठोस हल निकाले। आज की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें समस्त संगठन एक राय होकर अपनी भागीदारी दिखाया।
1) टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रस्तावित राष्ट्रीय आंदोलन को लेकर राज्य स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस संबंध में विभिन्न शिक्षक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें आंदोलन की रणनीति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
2)बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी 4 अप्रैल 2025 को दिल्ली में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में राज्य के विभिन्न संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। दिल्ली में रामलीला मैदान में छत्तीसगढ़ से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने कि बात कहीं।
3) आंदोलन को सफल बनाने के लिए राज्य से करीब 25 हजार शिक्षकों को दिल्ली ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ट्रेन, बस और अन्य माध्यमों से यात्रा की व्यवस्था करने पर भी चर्चा हुई। सभी संगठनों को अपने स्तर पर अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
4)इसके अलावा टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने प्रस्ताव रखा गया कि राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन के बाद राज्य स्तर पर भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार की जाएगी और आवश्यकतानुसार आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने भविष्य के लिए यह भी कहा कि सभी संगठन जो आज इस बैठक में शामिल है वह सभी संगठन आगे चलकर छत्तीसगढ़ TFI के नाम से कार्य करे इसका प्रस्ताव रखा और हमारे जो भी अहम मुद्दे जो बचे हुए हैं जैसे वेतन विसंगति कर्मोन्नति सेवा गणना और अन्य जो भी मुद्दे हैं उसको एक साथ मिलकर के एक ही मंच के तहत सरकार तक अपनी बात पहुंचा कर हल करने की पूरी पूरी कोशिश करेंगे लेकिन अभी प्रथम प्राथमिकता हमारी टेट है क्योंकि इसमें कई शिक्षकों की नौकरी जाने का चांसेस है,अगर वह टेट पास नहीं करते हैं तो कई शिक्षकों की नौकरी जा सकती है इसलिए हमें इस नेशनल मुद्दा बना करके इसे हम अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं कि सरकार इसके पक्ष में ठोस फैसला ले और जिस राज्य में जिस समय से लागू हुआ है उसी समय से इसे लागू करें।
5) बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 21 मार्च को राज्य के सभी जिलों में एवं 24 मार्च को सभी 146 विकासखंडों में संगठनों की समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी, जिससे आंदोलन की तैयारियों को मजबूत किया जा सके।
इस बैठक में सर्व शिक्षक संघ के प्रदीप पांडे ने कहा कि RTE के तहत 29(1) का जो नियम है उसे अगर सरकार चाहे तो वह अपना प्रस्ताव पारित करके एक अध्यादेश लाकर इसे खारिज कर सकती है जिससे सभी शिक्षकों का हित होगा, लेकिन सरकार इसे ध्यान नहीं दे रही है इसलिए हमें इस पक्ष में सरकार तक अपनी आवाज पहुंचानी पड़ेगी और अगर जरूरत पड़े तो हमें आंदोलन भी करना पड़ेगा और उन्होंने ऐसे संगठन को आड़े हाथ लिया जो हमारे एकता का समर्थन नहीं करते जो शिक्षक के हित में कार्य नहीं करते हैं वैसे संगठन का तत्काल बहिष्कार करने कि बात कहीं।
आज के बैठक में केदार जैन, रविन्द्र राठौर, मनीष मिश्रा, प्रदीप पाण्डेय, जाकेश साहू, विष्णु साहू विक्रम राय, विजय राव, कौशल अवस्थी, रंजीत बनर्जी, कमलेश सिंह बिसेन, ममता खालसा, रामचंद्र सोनवंशी, राजनारायण द्विवेदी, बसंत कौशिक, मोहम्मद यासिर इरफान, राजू टडन, आदित्य गौरव साहू और चेतन परिहार सहित बहुत से संगठन के पदाधिकारी और सदस्य शामिल रहे।
