नन्हे वैज्ञानिकों के नवाचारों से चमका महिदही: पूर्व माध्यमिक शाला में भव्य विज्ञान प्रदर्शनी संपन्न

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कबाड़ से जुगाड़ और वैज्ञानिक सोच का छात्रों ने पेश किया बेजोड़ उदाहरण
महिदही –  राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आज पूर्व माध्यमिक शाला महिदही के प्रांगण में एक दिवसीय विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में नन्हे छात्रों ने अपनी रचनात्मकता और तार्किक शक्ति का परिचय देते हुए विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल मॉडल्स के माध्यम से जीवंत कर दिया।विविध विषयों पर आधारित नवाचारी मॉडल्स
प्रदर्शनी में कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल्स को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में देखा गया:
* मानव शरीर विज्ञान: कक्षा 8वीं की प्रतिभा और पंकज ने क्रमशः श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र के क्रियाशील मॉडल पेश किए। वहीं, लिलेंद्र व हितेश ने मानव नेत्र की जटिल संरचना को बड़ी ही सरलता से समझाया।
* ऊर्जा और पर्यावरण: भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 5वीं की फामेश्वरी व लतेश ने पवन चक्की का मॉडल बनाया। मिट्टी के गुणों को समझाने के लिए शीतल और धारणा ने प्रयोगात्मक प्रदर्शन किया।
* भौतिक एवं संचार विज्ञान: 6वीं के हुमेन्द्र की मिसाइल और हीरा के ज्वालामुखी मॉडल ने दर्शकों को रोमांचित किया। विवेक (7वीं) ने टेलीफोन के जरिए संचार क्रांति और कृष्णा (8वीं) ने वायु दबाव के सिद्धांतों का प्रदर्शन किया।
* प्राथमिक स्तर का कौतुक: छोटे बच्चों में विज्ञान के प्रति रुझान स्पष्ट दिखा। 4थी के छात्र प्रमोद की ‘बैलून कार’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। जीविका, दीप्ति और संध्या ने चुंबक व जल विलेयता जैसे विषयों पर सराहनीय प्रस्तुति दी।
शिक्षकों का संदेश: “रटने से बेहतर है करके सीखना”
संस्था के प्रधान पाठक एवं शिक्षक वृंद ने बच्चों के इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम के दौरान कौशल प्रसाद साहू, महेश्वर श्रीवास, श्रीमती जानकी ठाकुर, श्रीमती हेमलता साहू, गजानंद वैष्णव और अशोक कुमार धुर्वे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
शिक्षकों ने संयुक्त रूप से कहा कि:
“इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। ‘कबाड़ से जुगाड़’ तकनीक का उपयोग कर कम लागत में बनाए गए ये मॉडल्स यह दर्शाते हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।”

प्रदर्शनी के अंत में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नन्हे वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया गया। इस आयोजन ने न केवल छात्रों बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के पालकों को भी विज्ञान के प्रति जागरूक करने का कार्य किया।