CG-TET 2026: प्रश्न पत्र की जटिलता और समय की कमी पर भड़का शिक्षकों का आक्रोश; अर्हता अंकों में कटौती की उठी पुरजोर मांग

रायपुर -छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने ‘छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (CG-TET) 2026 के परिणामों और परीक्षा पद्धति को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर परीक्षा की विसंगतियों को दूर करने और अर्हता अंकों (Passing Marks) में तत्काल शिथिलता बरतने की मांग की है।
परीक्षा की चुनौतियों पर फेडरेशन का पक्ष
फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में रेखांकित किया है कि 01 फरवरी 2026 को व्यापम द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा का स्तर अत्यंत कठिन और असंतुलित था। प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए फेडरेशन ने कहा:
* समय प्रबंधन की चुनौती: प्रश्न पत्र न केवल कठिन था, बल्कि इतना लंबा था कि निर्धारित 2.30 घंटे का समय अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके कारण कई योग्य अभ्यर्थी भी पूरा पेपर हल नहीं कर पाए।
* अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय: इस परीक्षा में वर्ष 1998 से 2011 के बीच नियुक्त हुए शिक्षक भी शामिल हुए थे। अपनी नियमित शासकीय सेवाओं के कारण इन शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया, जिससे उनके परिणाम प्रभावित होने की आशंका है।
* नियमों में ढील की आवश्यकता: वर्तमान में सामान्य वर्ग के लिए 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 50% अंक अनिवार्य हैं। प्रश्न पत्र की प्रकृति को देखते हुए इसे घटाकर सामान्य वर्ग हेतु 50% और SC/ST/OBC वर्ग हेतु 40% करने की मांग की गई है।
अन्य राज्यों का हवाला और विभागीय परीक्षा का सुझाव
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि ‘NCTE’ के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य सरकार के पास अर्हता अंकों में छूट देने का वैधानिक अधिकार है। बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने पूर्व में अपने शिक्षकों के हित में ऐसे निर्णय लिए हैं। साथ ही, तमिलनाडु की तर्ज पर विभागीय परीक्षा आयोजित करने या अनुभवी शिक्षकों को 15 अंकों का बोनस देने का सुझाव भी सरकार को दिया गया है।
मांग करने वाले प्रमुख पदाधिकारीगण:
प्रदेश भर के हजारों शिक्षकों की आवाज बनते हुए निम्नलिखित पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार से इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है:
रविन्द्र कुमार राठौर (प्रदेश अध्यक्ष), राजू टंडन (प्रदेश सचिव), देवेन्द्र हरमुख (प्रदेश उपाध्यक्ष), मनीष मिश्रा (प्रदेश संयोजक), शेषनाथ पाण्डेय (प्रदेश कोषाध्यक्ष)
कार्यकारिणी एवं सदस्य:
बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, सुरजीत सिंह चौहान, सिराज बक्श, पुरुषोत्तम झाड़ी, आदित्य गौरव साहू, टिकेश्वर भोई, तरुण वैष्णव, गोकुल जायसवाल, विजेंद्र चौहान, रोशन सहारे, नोहर चंद्रा, राजेंद्र वर्मा, मनीष डडसेना, हुलेश चंद्राकार, उमा पाण्डेय, नेमी सिन्हा, विपिन यादव, रूपिका रानी मरकाम, चंद्रप्रकाश तिवारी, दिलीप लहरे, अशोक कुमार धुर्वे, वीरेंद्र यादव, पंकज लहरें, दिनेश नायक, अशोक नाग, राम नरेश अजगल्ले, कोमल साहू, रीता भगत, महेश सेठी, दुर्गा वर्मा, मंजू देवांगन, बुधनी अजय, काशी नाथ बघेल, यशवंत यादव, मनोज कश्यप, सीडी भट्ट, रणजीत बनर्जी, आलोक त्रिवेदी, त्रिपेश चापड़ी, संतोष यादव, केशरी पैकरा, प्रदीप पटेल, आशीष गुप्ता, यशवंत दुबे, अभिजीत तिवारी, हेमकुमार साहू, छबि पटेल, इंद्रजीत शर्मा, बिहारीलाल बेरठ, राजेश मिश्रा, रामकृष्ण साहू, उत्तम बघेल, राजा राम पटेल, धनंजय सिंह, नान्हू राजवाड़े, रविन्द्र गिरी एवं दीनबंधु वैष्णव।
